1991 की Doordarshan Archive थिएटर का वायरल वीडियो: ‘Suno Re Kissa’ में मनोज बाजपेयी, रितुराज और पियूष मिश्रा की अद्भुत भूमिका और आज की उपलब्धियाँ
1991 में दूरदर्शन के आर्काइव थिएटर में प्रसारित ‘Suno Re Kissa‘ का वीडियो आज सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस नाटक में भारतीय सिनेमा के तीन महत्वपूर्ण अभिनेताओं—मनोज बाजपेयी, रितुराज, और पियूष मिश्रा—ने मुख्य भूमिकाएँ निभाएं हैं। यह वीडियो उन दिनों की याद दिलाता है जब भारतीय टेलीविजन पर थिएटर का जादू अपनी ऊंचाई पर था। आज, जब इन तीनों अभिनेताओं ने बॉलीवुड में अपनी अलग पहचान बनाई है, तो यह नाटक उनके संघर्षपूर्ण दिनों की कहानी भी बयाँ करता है। आइए, उन दिनों के पीछे के दृश्यों और आज की उनकी उपलब्धियों पर एक नज़र डालते हैं।
Table of Contents: Suno Re Kissa
‘सुनो रे किस्सा- Suno Re Kissa’ का कथानक और थीम
‘सुनो रे किस्सा’ एक सामाजिक नाटक था, जिसमें कहानी के माध्यम से समाज की विभिन्न समस्याओं पर व्यंग्य किया गया था। यह नाटक उस दौर की विभिन्न सामाजिक विसंगतियों को उजागर करने का प्रयास था। इसमें अभिनय करने वाले कलाकारों ने न केवल दर्शकों का मनोरंजन किया बल्कि उन्हें विचारशील भी बनाया। मनोज बाजपेयी, रितुराज और पियूष मिश्रा ने अपने-अपने किरदारों में जान डाल दी थी, और उनकी भूमिकाएँ आज भी उतनी ही जीवंत और प्रभावशाली मानी जाती हैं।
“Suno Re Kissa” के मूल सूत्रधार
यह ट्रेंडिंग विडियो 33 साल बाद 1991 के एक नाटक की है, जिसे तब दूरदर्शन पर दिखाया गया था. इस नाटक के निर्देशक हैं मशहूर थियेटर निर्देशक बैरी जॉन. इसकी पटकथा और गीत-संगीत सब पीयूष मिश्र का है. पीयूष के साथ-साथ इसमें अभिनेता मनोज बाजपेयी, दिव्या सेठ शाह और पूर्णिमा खड़गा भी नजर आ रहीं हैं. पियूष मिश्र ने कई फिल्मों में गाने लिखे भी हैं और गाये भी हैं उनमें से कुछ गाने तो कल्ट गाना साबित हुए हैं जैसे तमाशा, गुलाल और गैंग्स ऑफ़ वासेपुर जैसे गाने।
मनोज बाजपेयी: संघर्ष से सफलता तक
1991 के उस समय में मनोज बाजपेयी एक नवोदित अभिनेता थे, जिन्होंने थिएटर के माध्यम से अपने अभिनय करियर की शुरुआत की थी। ‘Suno Re Kissa’ में उनका प्रदर्शन इस बात का प्रमाण था कि वह आने वाले समय में एक बड़े अभिनेता बनेंगे। आज, मनोज बाजपेयी हिंदी सिनेमा के सबसे प्रतिष्ठित और सम्मानित अभिनेताओं में से एक हैं। उन्होंने “सत्या”, “गैंग्स ऑफ वासेपुर”, और “द फैमिली मैन” जैसी फिल्में और वेब सीरीज के माध्यम से अपनी बहुमुखी प्रतिभा का प्रदर्शन किया है। उनकी भूमिका, विशेष रूप से सत्या में, भारतीय सिनेमा में मील का पत्थर मानी जाती है।
पियूष मिश्रा: थिएटर से लेकर फिल्मों तक का सफर
पियूष मिश्रा एक बहुमुखी कलाकार हैं, जिन्होंने थिएटर, संगीत, लेखन और फिल्मों में अपने कदम जमाए हैं। 1991 में वह भी थिएटर के मंच पर सक्रिय थे, और ‘Suno Re Kissa’ में उनकी भूमिका ने दर्शकों का दिल जीत लिया था। उन्होंने “मक़बूल”, “गैंग्स ऑफ वासेपुर”, और “तमाशा” जैसी फिल्मों में अपने अनोखे अभिनय से अपनी छाप छोड़ी है। पियूष मिश्रा की लेखन और संगीत की भी एक विशेष पहचान है, और वह आज भारतीय फिल्म उद्योग के प्रमुख कलाकारों में गिने जाते हैं।
रितुराज: थिएटर के दिग्गज
रितुराज उन दिनों में थिएटर की दुनिया में एक जाना-माना नाम थे। उन्होंने न केवल ‘Suno Re Kissa‘ में बेहतरीन अभिनय किया, बल्कि वे कई अन्य थिएटर प्रस्तुतियों में भी सक्रिय रहे। हालाँकि रितुराज को फिल्मों में वह प्रसिद्धि नहीं मिली जो उनके अन्य साथियों को मिली, लेकिन उन्होंने थिएटर के माध्यम से अपने फैंस का दिल हमेशा जीता है। उनकी थिएटर में समर्पित यात्रा और अभिनय को आज भी थिएटर प्रेमी सराहते हैं।
‘Suno Re Kissa’ के पीछे के दृश्य
1991 का वह समय जब दूरदर्शन के आर्काइव थिएटर में ये नाटक फिल्माया गया था, तो सभी कलाकार संघर्ष के दौर से गुजर रहे थे। मंच पर दी गई हर प्रस्तुति के पीछे की कड़ी मेहनत और समर्पण उस वक्त के थिएटर कलाकारों की पहचान थी। मनोज बाजपेयी, पियूष मिश्रा और रितुराज तीनों उस समय में अभिनय की दुनिया में अपनी जगह बनाने के लिए संघर्ष कर रहे थे। उनके थिएटर के अनुभव ने उन्हें फिल्मों में भी एक बेहतर अभिनेता बनने में मदद की।
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आज की उपलब्धियाँ और पहचान
आज, जब ‘Suno Re Kissa‘ का वीडियो वायरल हो रहा है, यह इन तीनों कलाकारों की सफलता की कहानी भी बयाँ करता है। तीनों कलाकारों ने भारतीय सिनेमा में अपनी विशेष पहचान बनाई है और उनके योगदान को आज भी सराहा जाता है।
मनोज बाजपेयी
23 अप्रैल 1969 को जन्मे मनोज बाजपेयी एक प्रशंसित भारतीय अभिनेता हैं, जो तेलुगु और तमिल फिल्मों के साथ-साथ हिंदी सिनेमा में अपने काम के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने कई राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार और 2019 में पद्म श्री जीता है। सत्या (1998) में भीकू म्हात्रे के रूप में उनकी सफल भूमिका ने भारत के सबसे सम्मानित अभिनेताओं में से एक के रूप में उनकी प्रतिष्ठा को मजबूत किया।
पीयूष मिश्रा
पीयूष मिश्रा (जन्म प्रियाकांत शर्मा; 13 जनवरी 1963) एक भारतीय अभिनेता, गायक, गीतकार, नाटककार, संगीतकार और पटकथा लेखक हैं। मिश्रा संभल में पले-बढ़े और 1986 में नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा, दिल्ली से स्नातक की उपाधि प्राप्त की। इसके बाद, उन्होंने दिल्ली में हिंदी थिएटर में अपना करियर शुरू किया।
रितुराज सिंह
ऋतुराज सिंह (23 मई 1964 – 20 फरवरी 2024) एक भारतीय टेलीविजन अभिनेता थे जिन्होंने बॉलीवुड में प्रमुखता से काम किया। उन्होंने 1993 में ज़ी टीवी पर प्रसारित होगी अपनी बात, ज्योति, हिटलर दीदी, शपथ, वॉरियर हाई, आहट, अदालत और दीया और बाती हम जैसे कई भारतीय टीवी शो में अलग-अलग भूमिकाएँ निभाईं। उन्होंने कलर्स टीवी के धारावाहिक लाडो 2 में बलवंत चौधरी की भूमिका भी निभाई।
पूर्णिमा खड़गा
पूर्णिमा खड़गा एक थेटर कलाकार हैं और साथ ही अंतर्राष्ट्रीय कथक नर्तकी हैं, शुरुआत में वह प्रसिद्ध पंडित बिरजू महाराज के सानिध्य में कथक की शिक्षा ली हैं। नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (एनएसडी) में डिग्री भी हांसिल की हैं। एनएसडी में रघुवीर यादव भी क्मलास्हस्जस्मेत रहें है और मिलने के 6 महीने के अंदर ही दोनों ने साल 1988 में जबलपुर के उनके एक गांव में दोनों से शादी कर ली। लेकिन अब इन दोनों में अलगाव हो गया है ।
दिव्या सेठ शाह

दिव्या सेठ शाह एक भारतीय फिल्म और टेलीविजन अभिनेत्री हैं, जिन्होंने अपने करियर की शुरुआत टीवी धारावाहिक “हम लोग” में मझली का किरदार निभाकर की थी। वह अभिनेत्री सुषमा सेठ और ध्रुव सेठ की बेटी हैं।
उन्होंने दिल्ली में बैरी जॉन के साथ थिएटर, टेलीविजन शो और जब वी मेट जैसी फिल्में कीं।
निष्कर्ष
1991 का दूरदर्शन / प्रसार भारती आर्काइव थिएटर का ‘Suno Re Kissa’ नाटक न केवल भारतीय टेलीविजन इतिहास का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, बल्कि यह उस दौर के संघर्षशील कलाकारों की यात्रा का भी प्रतीक है। आज, जब मनोज बाजपेयी, पियूष मिश्रा और रितुराज बड़े सितारे बन चुके हैं, यह वीडियो उनकी यात्रा की एक झलक प्रस्तुत करता है।
सुनो रे किस्सा आज भी दर्शकों के दिलों में बसा हुआ है और इसका वायरल होना इस बात का प्रमाण है कि अच्छे कंटेंट की कोई सीमा नहीं होती।